बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल

Full information about Khayal gayan, Chhota Khayal and Bada Khayal.

Friday, June 26, 2020

ख्याल

हेलो...!!! दोस्तों...!!! फिर से आपका स्वागत है हमारे आज के नए संगीत के टॉपिक में। आज मैं आपको बताऊंगा ख्याल गायकी क्या होती है और उसके साथ साथ बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल के बारे में पूरा डिटेल में जानेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं।

ख्याल गायकी

ख्याल गायकी भारतीय शास्त्रीय संगीत की राग प्रस्तुत करने की एक सुप्रसिद्ध शैली है। ख्याल का अर्थ  सोचना, विचारना या किसी को याद करना होता है। उसी प्रकार भारतीय शास्त्रीय संगीत में ख्याल का अर्थ है कि हमारी कल्पना शक्ति अनुसार संगीत के माध्यम से राग को प्रस्तुत करना और उसे अधिक सुंदर बनाना। अपनी सोच और समझ से किसी भी राग को अपनी तरीके से प्रस्तुत करना ही ख्याल गायकी का अर्थ दर्शाता है। राग प्रस्तुतकर्ता अपने कौशल के अनुसार राग की सुंदरता को प्रकट करता है। ख्याल गायकी की दो शैलियां है। १. बड़ा ख्याल और २. छोटा ख्याल 
इन दोनों शैलियों में ही राग विस्तार के चार तत्व अलापी, बंदिश, लयकारी और तान का उपयोग किया जाता है। अगर आपने राग विस्तार के इन चारों तत्वों के बारे में नहीं पड़ा है तो मैं यहां पर उसका लिंक शेयर कर रहा हूं जिससे आपको ख्याल गायकी के बारे में और अच्छी तरह से समझ पाएंगे। 


दोनों ही शैलियों में इन चार तत्वों को पाया जाता है। लय एक ऐसा तत्व है जिसके कारण दोनों शैलियों को अलग-अलग समझा जा सकता है। बड़ा ख्याल में लय या गति विलंबित प्रकार की यानी कि बहुत ही धीमी होती है छोटा ख्याल लय मध्यम या दृत प्रकार की होती है।

Bada khayal Chhota khayal
खयाल गायकी



बड़ा ख्याल :-  बड़ा ख्याल को धीमी गति में या विलंबित गति में गाया जाता है। धीमी गति होने के कारण दो बीट्स के बीच का अंतर बहुत ज्यादा होता है। जिससे राग की बंदिश के बालों को बहुत खींच कर गाया जा सकता है और कलाकार को अपनी कला दिखाने का अधिक समय मिल जाता है। इसी कारण से कलाकार अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग करके राग के नियमों के अनुसार बड़ा ख्याल की सुंदरता प्रदर्शित करता है । बड़ा ख्याल का गायन करने से बहुत सारे लाभ होते हैं। जिससे हमारे गायकी को अच्छी तरीके से सुधारा जा सकता है। 

बड़ा ख्याल गायकी के लाभ - 
  • ताल में बंध कर चलना सिखाता है।
  • सुरों में ठहराव, स्टेबिलिटी लाता है।
  • गले में बेस लाने में सहायता करता है।
  • ताल में लयबद्ध रहने में भी सहायता करता है।

छोटा ख्याल :- छोटे ख्याल को मध्यम या दृत लय में गाया जाता है। इस प्रकार की शैली में गति ज्यादा होने के कारण दो बीट्स के बीच का अंतर बहुत कम होता है। जिससे कलाकार को अपनी कल्पना शक्ति का बहुत ही जल्दी से उपयोग करना होता है और अपनी प्रस्तुति को सुंदर बनाना होता है। लय ज्यादा होने के कारण छोटी छोटी मूखिॅयां लेकर या बंदिश के बालों के साथ खेल कर राग की पेशकश की जाती है। छोटा ख्याल गायन के भी बहुत लाभ है। जो गायकी में सुधार ला सकते है।

छोटा ख्याल के लाभ -
  • गायकी को बेहतर बनाता है।
  • स्पीड में हरकत लेने में सहायता मिलती है।
  • फिल्मों के गाने अच्छी तरह से गाने में सहायता मिलती है।
  • तान और अलंकार गति में गाने से गले के मसल्स एक्टिव रहते हैं।
तो यह थी आज की जानकारी बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल के बारे में। मुझे विश्वास है आप को यह बहुत पसंद आया होगा। आप किस टॉपिक पर जानकारी चाहते हैं वह आप मुझे कमेंट करके बता सकते हैं। अगली बार फिर मिलेंगे ऐसे ही इंटरेस्टिंग टॉपिक के साथ। शुक्रिया। 

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English translation


Khayal

Hello...!!! Friends ... !!! Welcome back to our new topic about music. Today I will tell you what Khyal singing is and along with it, I will know in full detail about Bada Khyal and Chhota Khyal. So let's start.

Khayal singing

Khyal singing is a well-known genre of Indian classical music. Khayal means thinking or missing someone. Similarly, in Indian classical music, khyal means to present the raga and make it more beautiful through music according to our imagination. Presenting any raga in your own way with your thinking and understanding shows the meaning of singing. The raga presenter reveals the beauty of the raga according to his skills.  There are two styles of singing. 1. Bada khayal and 2. Chhota khayal
Both of these styles use the four elements of raga vistar: alapi, bandish, lyaakari and taan. If you have not read about these four elements of the raga expansion, then I am sharing its link here so that you will get a better understanding of the Khayal singing.

These four elements are found in both styles. Rhythm is an element that causes the two styles to be understood differently. The rhythm or tempo in the Bada khayal is very slow it is called vilambit laya and the tempo in the Chhota khayal is medium and fast it is called Madhya laya and Dhrut laya.

Bada Khayal Chhota Khayal
Khayal Gayaki


Bada Khyal: - Bada Khyal is sung in slow or delayed motion. Due to the slow speed, the difference between the two beats is very high. So that the bandish of the raga can be sung with a lot of expansion and the artist gets more time to show his art. For this reason, the artist uses his imaginations to demonstrate the beauty of Bada khayal according to the rules of raga. There are many benefits from singing Bada khayal.  So that our singing can be improved properly.

Benefits of Bada khayal singing  -
  • Teaches to stay in a rhythm.
  • Stagnation in notes brings stability.
  • Helps bring base to the vocal chords.
  • It also helps in keeping mind in rhthym.
 
Chhota Khayal - Chhota Khyal is sung in a medium or double speed. In this type of style, the difference between the two beats is very small due to the high speed. So that the artist has to use his imaginations very quickly and make his presentation beautiful. Due to the high speed, a raga is performed by taking small variation and playing with words of bandish. This type of singing is also very beneficial. Which can helps improve singing.

Benefits of Chhota khayal
  • Improves singing.
  • Speed ​​helps in taking action with throt.
  • It helps to sing movie songs very well
  • Sing Taan and Alankar in speed helps our throt muscles to be active.
So this was today's information about Bada khayal and Chhota Khayal. I believe you would have liked it very much. You can tell me which topic you want information on. See you again next time with similar interesting topics. Thank you. 





Musical info.

Author & Editor

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